गर्मी का मौसम और गन्ना रस न पियें तो इस मौसम का मज़ा ही अधूरा है l पर इसमें छुपे स्वास्थ्य संकट को जानना और सावधान रहना भी लम्बे समय तक इस मज़ा के लिए जरूरी है l

हर शहर में सड़क और चौक के किनारे थोड़ी, थोड़ी दुरी पर गन्ना रस ठेले एक आम दृश्य हैं, जहाँ हर वर्ग के लोग इस मौसम में रुक कर रस पान का आनंद उठाते है l ज्यादातर लोग इस बात का ध्यान नहीं रखते की जिस गिलास में उन्हें गन्ना रस परोसा जा रहा है उसे किस प्रकार धोया जाता है ?

लगभग हर ठेले में गिलासों को एक बाल्टी या अन्य पात्र में केवल डुबोया जाता है l यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है की एक ही बार स्टोर किया गया पानी में बार बार गिलासों को डुबोया जाता है l दूसरा, गिलासों के उपरी हिस्सों को ऊँगली से घिस, घिस कर शायद ही कहीं धोया जाता है l
यदि बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, विशेषकर पीलिया, गस्त्रोएन्त्रितिस, टाइफाइड जैसे रोग ग्रस्त लोगों के थूक यदि गिलासों के उपरी हिस्से में लगे रह जाएँ, तो बड़ी आसानी से ये जल जनित रोग वैसे गिलासों से स्वस्थ और निरोग व्यक्तियों को स्पर्श कर लेंगे l
इस प्रकार के ठेलों में हर ग्राहक के लिए यह परमावश्यक है की वे ठेले वाले को गिलासें अच्छे से धोने के लिए मजबूर करें l ठेले वालों को बाध्य करें की वे साफ़ उँगलियों से व्यवहार किये गये गिलासों को रगड़ कर धोएं, सूखे कपड़ों से पोछें, और जिस पानी में गिलासों को डुबोया जा रहा है वह स्वच्छ होl

उक्त अवलोकन को साझा करते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह सलाह दी की जिन ठेलों में डिस्पोजेबल गिलासों में रस या अन्य पेय परोसा जाता है, उन्ही का चयन करें l लोक स्वस्थ्य के दृष्टिकोण से यह सलाह भी उचित होगी की ठेले वालों को उक्त स्वास्थ्य संकट के विषय में जागरूक की जायl

जागरूक होकर गन्ना रस पिने, पिलाने से ठंडाई का आनंद सुदीर्घ होकर पूरा मौसम लोगों को खींचेगा और आर्थिक कमजोर वर्ग को अच्छी आय प्रदान करेगाl अन्यथा, पिए- पिलायें गन्ना रस और बेचे-ख़रीदे बीमारियाँ l कहीं गन्ना रस की बिल इतनी बड़ी न हो की वह किसी स्वस्थ व्यक्ति को अस्पताल तक ले जाएँl

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