संतान संभवा महिलाओं को यदि कोई भी शारीरिक समस्या के कारणवश चिकित्सकीय सलाह पर नैदानिक परिक्षण हेतु विकिरण (रेडिएशन) वाली मशीनों के संपर्क में आना पड़े तो उन्हें कभी भी अपनी गर्भावस्था को चिकित्सक से नहीं छिपाना चाहिए l गर्भावस्था में विकिरण के दुष्प्रभाव एक जागरूकता का विषय है यदि ‘स्वस्थ मां, स्वस्थ संतान, स्वस्थ समाज’ के सपने को मूर्त रूप देना हो l
छत्तीसगढ़ के चिकित्सा विशेषज्ञों एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस विषय में गंभीरता से कहा कि रेडिएशन की किरणें दिखाई नहीं देती, लेकिन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर डालती है।
गर्भवती महिलाओं का कैंसर संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। गर्भावस्था में रेडिएशन पेट में पल रहे बच्चे में नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है।
गर्भावस्था में रेडिएशन के कारण संतान संभवा मां के सांस लेने पर रेडियो एक्टिव मैटीरियल शरीर में खींच लेती है। मां के खून से रेडियो एक्टिव मैटीरियल गर्भस्थ संभावित शिशु तक पहुंच जाते हैं। पेट में पल रहा बच्चा अर्ली डेवलपमेंट स्टेज में अधिक सेंसिटिव होता है। प्रेग्नेंसी में रेडिएशन के कारण होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।

कुछ विशेषज्ञों की अनुसार नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन, आयोनाइजिंग रेडिएशन की तुलना में हल्की होती है। हॉस्पिटल में एक्स-रे मशीन, सीटी स्कैनर आदि आयोनाइजिंग रेडिएशन वाले होते हैं। गर्भावस्था में नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन से गर्भ में पलने वाले शिशु को ज्यादा नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं रहती है। विशेषज्ञों ने पुनः दुहराया कि अर्ली स्टेज रेडिएशन के लिए अधिक संवेदनशील होती है। गर्भावस्था में रेडिएशन का प्रभाव दो हफ्ते से अठारह सप्ताह के दौरान अधिक रहता है। विकिरण की कम मात्रा अजन्मे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।
न कवल विकिरण बल्कि कुछ दवाइयां, अल्कोहल से भी परिहार अत्यंत आवश्यक हैl अजन्मे बच्चे का संभावित माता के गर्भ में तेजी से विकास हो रहा होता है। ऐसे में विकिरण बच्चे में कुछ जन्मदोष या ल्यूकेमिया जैसी बीमारी हो सकती है। —————————