यदि छत्तीसगढ़ राज्य के अंग, प्रत्यंग और उपांग को स्वस्थ नागरिकों से परिपूर्ण कर सृजनशीलता की मलय पवन युक्त यत्र, तत्र और सर्वत्र मधुर आमंत्रण करने वाली तरंगमय परिवेश निर्माण करना हो, तो इस व्रत-पूजा में हम सभी को मदिरापान के विविध दुष्परिणामों को जानकार इनसे बचना होगाl एक दुष्परिणाम है कि मदिरापान करनेवाली महिला एक ऐसे बच्चे को जन्म दे सकती है, जो पूर्ण निर्दोष होकर भी जीवन पर्यन्त शारीरिक समस्या से जुझता रहेगाl

शराब के दुष्परिणामों में एक है भ्रूण शराब स्पेक्ट्रम विकार, जिसे अंग्रेजी भाषा में Fetal Alcohol Spectrum Disorders (FASDs) कहते हैं l यह ऐसे व्यक्ति में हो सकता है जो गर्भावस्था के दौरान अपनी माँ के मदिरापान के कारण भूमिष्ठ होने से पहले ही मदिरा के संपर्क में आया हैl ऐसे व्यक्तियों में खराब समन्वय, व्यवहार संबंधी समस्याएं, सीखने की कठिनाईयां, सुनने और देखने में समस्याएं शामिल हो सकती l विद्यालय और जीवन के अन्य क्षेत्र में भी परेशानी होने की अधिक संभावना है। लक्षणों में असामान्य उपस्थिति, कम ऊंचाई, शरीर का कम वजन, छोटे आकार का सिर हैंl उक्त विकार वाले बच्चों में  न केवल बौद्धिक और विकासात्मक अक्षमतायें बल्कि कई प्रकार की अन्य समस्याएं हो सकती हैं। वे शारीरिक विकास में भी देरी कर सकते हैं। एफएएसडी एक उदय-अस्त,  जीवन पर्यन्त समस्या हैl

शराब का सेवन नाल के माध्यम से गर्भनाल से होकर गुजरता है। शराब बच्चे तक पहुंचना आसान होता है। बच्चे के विकासशील शरीर में प्रवेश करने के बाद अल्कोहल मस्तिष्क, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, हृदय, आंख, कान, पैर, हाथ, दांत, भ्रूण के तालू और शरीर प्रणाली को प्रभावित करता है। यदि माँ गर्भावस्था के दौरान मदिरापान जारी रखती है, तो यह यह उच्छल, तरल, प्रलय मदिरा अजन्मे बच्चे को कई शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और बौद्धिक समस्याओं के जोखिम में डालती हैl विकासशील भ्रूण शराब के प्रति बेहद संवेदनशील होते है l

गर्भावस्था पर शराब के हानिकारक प्रभावों में शामिल हैं, समय से पहले जन्मl समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के समय और बाद में जीवन में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। भूमिष्ठ संतान का शारीरिक कम वजन का होना एक और दुष्परिणाम हैl गर्भ में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है

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