प्रदेश के आयुर्वेद संचनालय के अधीनस्थ अंशकालीन स्वच्छकों की पीड़ा का अंदाजा इस वास्तविकता से लगाया जा सकता है कि उनके समकक्षों का नियमितीकरण हो चुका पर उनका संघर्ष जारी है।

आयुर्वेद विभागीय सेटअप में स्वीकृत ७५० अंशकालीन स्वच्छकों के पदों पर सन १९९७ के पूर्व से लगभग ४५० उक्त पद पर कार्यरत है।

शासन का ध्यान आकर्षण कर समय समय पर ऐसे स्वच्छको को पूर्णकालिक कर संबंधित विभागों के रिक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद पर समायोजन, नियमित करने का मांग किया गया।

तत्कालीन प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, श्री एम के राउत के निर्देशानुसार संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ के अधीन कार्यरत अंशकालीन स्वच्छकों को जिला स्वास्थ्य समिति बनाकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा पूर्णकालिक कर रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर समायोजित किया गया है।

प्रदेश के अन्य विभाग जैसे सिंचाई विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक निर्माण, पशु चिकित्सा में लगभग १३०० अंशकालीन स्वच्छकों को पूर्णकालिक कर वरिष्ठता के आधार पर रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर समायोजन/ नियमित किया गया है।

संचालक,आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होम्योपैथी, (आयुष) के द्वारा अनेक बार वित्तीय भार सहित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। तत्कालीन संचालक, आयुष, डॉक्टर प्रियंका शुक्ला द्वारा संचनालय, आयुष के अधीन कार्यरत अंशकालीन स्वच्छकों को पूर्णकालिक करने हेतु वित्तीय भार सहित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। रुपए चार करोड का अतिरिक्त वित्तीय भार अनुमानित है। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ को ज्ञात हुआ है कि उक्त प्रस्ताव को वित्तीय विभाग द्वारा अमान्य कर दिया गया है।

अंशकालीन के द्वारा विभागवार कार्य न लेकर पूर्णकालिक कार्य लिया जाता है एवं कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान किया जाता है।

शासन द्वारा विभिन्न विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों को नियमितीकरण की कार्यवाही विचाराधीन है। विभागों द्वारा समय समय पर कर्मचारियों का विवरण शासन को प्रेषित की गई है किंतु अंशकालीन स्वच्छकों की जानकारी नहीं भेजी गई। संघ ने मांग किया है की अनियमितों की सूची मैं इन्हे जोड़ा जाए।

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