कर्मचारी जगत के इतिहास मे कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं कर्मचारी अधिकारी महासंघ श्री कमल वर्मा एवं श्री अनिल शुक्ला दोनो ने जब जब कर्मचारी अधिकारी के मांगो को लेकर आंदोलन किये है फेडरेशन के किसी भी पदाधिकारी को शासन प्रशासन ने चर्चा के नही बुलाया तत्कालीन शासन काल मे अनिश्चित कालीन आंदोलन के दौरान तत्कालीन मंत्री आदरणीय रविन्द्र चौबे के बंगले मे जाकर निशर्त आंदोलन को स्थगित करना पड़ा कई विभाग के कर्मचारियो को हड़ताल अवधि का कटा वेतन नही मिला इनकी मांगे सिर्फ दिखावा रहता है कर्मचारी इनके भ्रम जाल मे आकर अपने अपने विभागीय संगठनो का अस्त्वि धीरे धीरे खोते जा रहे यही इनकी उपलब्धि है, क्योंकि आंदोलन मे इनका इतने कर्मचारी संघ आंदोलन मे सम्मलित है का भ्रम जाल फैलाया जाता है और संगठनो मे तोड़ फोड़ कर ऐसे स्वार्थी नेता पैदा कर अपने कुम्बा की संख्या को दर्शाता है दुसरी ओर कर्मचारी अधिकारी महासंघ के चाहे एक दिवसीय हों तीन दिवसीय हो शासन महासंघ से जुड़े मंत्रालयीन कर्मचारी संघ हो या वन कर्मचारी संघ हो या स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हो विभागीय मंत्री विभागीय सचिव यहां तक मुख्य सचिव चर्चा के बुलाकर मांगो पर विस्तार से चर्चा कर सकारात्मक कार्यवाही भी किये है, जिसका उदाहरण स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चित कालीन आंदोलन के दौरान तत्कालीन स्वा मंत्री टी एस सिंह देव के द्वारा प्रतिनिधि मण्डल को मुख्य मंत्री से चर्चा कराकर मुख्य सचिव संघ प्रतिनिधि मण्डल को चर्चा के लिए बुलाना एवं कार्यवाही किया जाना,इसी प्रकार तीन दिवसीय आंदोलन मे दूसरे ही दिन तत्कालीन प्रमुख सचिव श्रीमति मनिन्दर कौर के द्वारा चर्चा के लिए बुला कर कर्मचारी हित मे वेतन मान के लिए कार्यवाही करना प्रमुख था अब कर्मचारी को अपने भविश्य को सुरक्षित करना है पिछलग्गू चलना है ऐसे ही रहा तो जो छटवे वेतन मान का प्रस्ताव केन्द्र के कर्मचारियों की भांति था वो भी कूड़ादान मे जाते दिख रहा है आठवे का तो सोचना सपना है स्वास्थ्य कर्मचारी हित मे जारी, बंटोगे तो कटोगे संगठित रहोगे तो सफलता मिलेगी, एक रहो सेफ रहो

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