सेवानिवृत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ मीरा बघेल, जो रायपुर जिले में पदस्थ थी, ने अपने कार्यकाल के दौरान शासकीय आदेश की स्पष्ट अवहेलना करते हुए प्रदेश शासन की आर्थिक हानि कारित करते हुए वाहन चालकों को अनुचित वेतन प्रदाय कर उन्हें आर्थिक लाभ पहुँचाया l शासन को तत्कालीन उक्त अधिकारी के उक्त कृत्य से लगभग ५० लाख की आर्थिक हानि हुई हैl आश्चर्यजनक तथ्य यह है की उक्त आर्थिक हानि की राशि को उसी अधिकारी से वसूलने के शासकीय अनुशंषा के विपरीत वर्तमान रायपुर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में वाहन चालकों से किया जा रहा हैl

 

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे पर शासकीय पत्राचार के प्रति ध्यानाकर्षण किया है, और यह निष्कर्ष निकाला है कि ऐसा कृत्य एक चिकित्सक तथा शासकीय अधिकारी के प्रति उनके पूर्वजों-अग्रजों द्वारा स्थापित किये गये विश्वास की भावना को ठेस पहुंचाता हैl एक तरफ शासन का क्षति होना और दूसरी तरफ कथित जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारी को ही कोपमुक्त रखना!

संघ ने शासकीय पत्राचार का हवाला देते हुए विषयगत तथ्य को इस प्रकार सामने लाया है कथित भ्रष्ट अधिकारी द्वारा अपने कार्यकाल में वाहन चालकों को ग्रेड पे १९०० के स्थान पर ग्रेड पे २२०० दिया गया l  जिस आदेश के तहत यह किया गया उसके दिनांक तथा अन्य विवरण अभिलेख तथा पत्राचार में स्पष्ट संधारित हैंl

उक्त आदेश के पूर्व आयुक्त सह संचालक, स्वास्थ्य सेवाएँ के एक पत्र दिननक ३०.१०.२०१८ में यह निर्देश था की संचनालय, स्वास्थ्य सेवाएँ के अंतर्गत स्वीकृत वाहन चालक के सभी पदों पर ग्रेड पे १९०० निर्धारित था lसंचनालय, स्वास्थ्य सेवाएँ के पत्राचार में यह स्पष्ट अनुशंशा है की तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला रायपुर, डॉ मीरा बघेल के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर उनके द्वारा किये गये अनुचित भुगतान की वसूली उन्ही से की जाय l

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के संज्ञान में उक्त पत्राचार के विपरीत यह तथ्य दिवालोक में सामने आया है कि रायपुर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कार्यरत वाहन चालकों से अतिरिक्त मिली राशी की वसूली की जा रही हैl संघ ने इस पर रोक लगाने की मांग की हैl

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