रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया से मुलाकात कर नर्सिंग कैडर एवं कर्मचारियों से जुड़े कई लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल में प्रांताध्यक्ष अनिल कुमार पाण्डेय, महामंत्री एस.पी. देवांगन, रायपुर जिलाध्यक्ष सालिक नौरंगे, प्रांतीय संयोजक नर्सिंग जैकलिन दान, विभागीय नर्सिंग अध्यक्ष जॉली थॉमस, प्रांतीय सचिव अरविन्द चंद्राकर, प्रांतीय संयोजक एमएलटी कमल चंद्राकर और आरएचओ प्रकोष्ठ के जिला संयोजक असवन टंडन , अजीत मिंज सरगुजा शामिल थे।
संघ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 20 अगस्त 2026 को जारी अनुमति पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि पांच नए मेडिकल कॉलेज (दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा) और पुराने कॉलेजों के लिए कुल 375 पदों तथा संबद्ध अस्पतालों के 330 पदों पर सीधी भर्ती की अनुमति दी गई है। इनमें नर्सिंग अधीक्षक, उप नर्सिंग अधीक्षक, सहायक नर्सिंग अधीक्षक, नर्सिंग सिस्टर सहित कई पद शामिल हैं, जो नियमानुसार पदोन्नति के पद हैं। संघ का आरोप है कि इन पदों पर सीधी भर्ती से कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता बंद हो जाएगा।

संघ ने वेतन स्तर में भी गड़बड़ी बताई। नर्सिंग सिस्टर का वेतन स्तर-9 होना चाहिए, लेकिन अनुमति पत्र में स्तर-8 अंकित किया गया है। इसी तरह अन्य पदों के वेतन स्तर भी गलत बताए गए हैं। संघ ने छत्तीसगढ़ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयीन शैक्षणिक आदर्श सेवा नियम-2019 को गैर-शैक्षणिक पदों पर लागू करने को नियमों के विपरीत बताया है।
तीन-चार साल से रुकी पड़ी पदोन्नति का मुद्दा भी उठाया गया। नर्सिंग सिस्टर, सहायक नर्सिंग अधीक्षक और नर्सिंग अधीक्षक के पदों पर पदोन्नति न मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कई वरिष्ठ कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों का काम प्रभावित हो रहा है। संघ ने दोनों निदेशालयों में इन पदों पर तत्काल पदोन्नति की मांग की।
एमएससी और पीएचडी नर्सिंग योग्यताओं वाले करीब 400 कर्मचारियों को स्टाफ नर्स या नर्सिंग सिस्टर के रूप में काम करने को मजबूर बताया गया। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में इनकी योग्यता के अनुरूप पद रिक्त हैं, लेकिन वहां संविदा भर्ती की जा रही है, जिससे सरकार पर सालाना करीब 17 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। संघ का सुझाव है कि इन कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर शैक्षणिक कार्य सौंपा जाए, जिससे सरकार को बचत भी होगी और कर्मचारियों को उनकी योग्यता का लाभ भी मिलेगा।
नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सहायक व उप नर्सिंग अधीक्षक के रिक्त पदों पर वरिष्ठता और सहमति के आधार पर पदस्थापना की मांग भी की गई। डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सेटअप संबंधी गड़बड़ी का भी जिक्र किया गया।
संघ बहुत खेद व्यक्त करते हुए अवगत कराया कि चिकित्सा शिक्षा में विगत 8-9 वर्षों से नर्सिंग संवर्ग के समयमान का प्रकरण लंबित है , कई कर्मचारी का निधन हो गया है और कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए है और कई सेवानिवृत होने वाले है, जो समयमान के लाभ से वंचित है तत्काल कार्यवाही करने का निवेदन किया गया
प्रतिनिधि मंडल ने इन सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की अपील की, ताकि नर्सिंग कर्मचारियों को न्याय मिले और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें।
माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी को यह भी अवगत कराया गया कि आपके द्वारा की गई नर्सिंग कैडर के पदनाम परिवर्तन की घोषणा का आदेश अभी तक प्रसारित नहीं हुआ है जिससे कैडर के कर्मचारियों में भारी हताशा है, माननीय मंत्री जी तत्काल आदेश प्रसारित करने हेतु आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को फोन कर प्रतिनिधि मंडल से मिलने का निर्देश दिया गया, प्रतिनिधि मंडल श्री रितेश अग्रवाल आयुक्त चिकित्सा शिक्षा से भेंटकर, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा किया, पदनाम परिवर्तन का जल्दी आदेश प्रसारित होने काआश्वासन दिया गया