शासकीय चिकित्सक प्रदेश की आम जनता, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के स्वास्थ्य संकट के समय सबसे बड़े सहारे होते हैं। जनता यह जानकर शायद दुखी होगी की शासकीय चिकित्सकों की पीड़ा शमन करनेवाला कोई नहीं।
स्टेट गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष डॉ गोकुल चंद्र सरकार ने स्वास्थ्य संदेश को यह जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के पृथक राज्य बनने के बाद से लेकर आज तक के विकास सफर में शासकीय चिकित्सक, जिनका पदनाम मेडिकल अफसर होता है, को एक भी बार पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया।
मेडिकल अफसर के पद से पदोन्नतियां क्रमश जिला स्वास्थ्य अधिकारी/खंड चिकित्सा आधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा उप संचालक तक होते हैं, पर आज तक ये पदोन्नतियां नही हुई है।
डॉ सरकार ने आगे बताया कि जो मेडिकल अफसर स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा उत्तीर्ण कर लेते है उन्हें स्पेशलिस्ट के पद पर पदोन्नत किया जाता है। राज्य में इस प्रकार अपना उन्नयन किए मेडिकल अफसरों में से कुछ ही चिकित्सकों को इस पदोन्नति का लाभ मिला है। वर्तमान में राज्य में मेडिकल अफसरों की संख्या लगभग २५०० है।