छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: फार्मासिस्ट अश्वनी गुर्देकर को मिली राहत, रजिस्ट्रार पद का अतिरिक्त प्रभार जारी रहेगा रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद पर फार्मासिस्ट अश्वनी गुर्देकर को सौंपे गए अतिरिक्त प्रभार को लेकर हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में फार्मासिस्टों को बड़ी जीत मिली है।माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर की डबल बेंच ने 15 मई 2026 को ग्रीष्मकालीन अवकाश से ठीक पहले एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। अब अश्वनी गुर्देकर रजिस्ट्रार के पद पर अतिरिक्त प्रभार के साथ कार्य जारी रख सकेंगे।मामला क्या था?छत्तीसगढ़ शासन स्वास्थ्य मंत्रालय ने 14 मार्च 2024 को अंबेडकर अस्पताल रायपुर के वरिष्ठ फार्मासिस्ट अश्वनी गुर्देकर को छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। डॉ. राकेश गुप्ता ने इसे चुनौती देते हुए क्वो वारंटो याचिका (WPS/773/2025) दायर की थी।माननीय एकल पीठ (जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू) ने 3 मार्च 2026 को शासन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद अश्वनी गुर्देकर ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप जौहरी एवं जे.के. गुप्ता के माध्यम से रिट अपील (WA/392/2026) दायर की।डबल बेंच का महत्वपूर्ण फैसलामुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा:अश्वनी गुर्देकर को स्थायी नियुक्ति नहीं, केवल अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।यह शासन की अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसे सार्वजनिक पद का अवैध कब्जा नहीं माना जा सकता।जब तक मनमानी, दुर्भावना या स्पष्ट वैधानिक उल्लंघन न हो, न्यायालय को अस्थायी व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।कोर्ट ने नियमित रजिस्ट्रार की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का भी निर्देश दिया।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फार्मासिस्ट को रजिस्ट्रार पद पर रखने संबंधी नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पहले से चल रही है।अधिवक्ता सुदीप जौहरी ने कोर्ट में जोर देकर कहा था कि यह याचिका व्यक्तिगत द्वेष और प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित थी, न कि सार्वजनिक हित से।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री एस.पी. देवांगन ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह कर्मचारी हित में लिया गया निर्णय है। माननीय उच्च न्यायालय ने सेवा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला सुनाया।

”संघ के अन्य पदाधिकारियों ने भी फैसले का स्वागत किया, जिनमें ओ.पी. शर्मा (संरक्षक), अनिल पाण्डेय (प्रांताध्यक्ष), असलम खान, प्रदीप बोगी, संतोष देवांगन, एस.एस. सोनी, सालिक नौरंगे, हरिशंकर साहू, जयसिंह कोर्राम, देवेंद्र साहू, कमल चंद्राकर, अरविंद चंद्राकर, अश्वन टंडन, बेदराम, आदि शामिल हैं।अश्वनी गुर्देकर ने फैसले के बाद शासन को सूचना दे दी है और लंबित फार्मासिस्ट पंजीयन तथा नवीनीकरण का कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है।