वहीदा रहमान द्वारा अभिनीत यादगार फिल्म खामोशी की कहानी, जिसमे उन्हें नर्स की भूमिका में अंत में सदमा लगता है, छत्तीसगढ़ के शासकीय स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों के स्टाफ नर्स संवर्ग की व्यथा के सादृश्य है।

सेवानिवृत्ति के समय उन्हें मिलने वाली राशि से शासन भारी रकम कटौटी कर रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ उक्त कटौती को अनुचित ठहराते हुए विविध मुद्दों के साथ इस मुद्दे पर भी शासन के विरुद्ध आंदोलनरत है।

अविभाजित मध्यप्रदेश शासन के कालखंड १९८५ में एक शासकीय आदेश के परिपालन में सभी स्टाफ नर्स को ड्यूटी ज्वाइनिंग के समय ३/४ वेतन वृद्धि का लाभ एक साथ दिया जाने लगा। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व के पश्चात भी वह आदेश प्रभावशील रहा। डिप्लोमाधारी को ३ और डिग्रीधारी को ४ वेतन वृद्धि एक साथ दी जाती थी।

बिना किसी शासकीय आदेश के वर्तमान में सभी जिलों में संभागीय संयुक्त संचालक , कोश, लेखा व पेंशन द्वारा उक्त वेतन वृद्धि के चलते दी है राशि की कटौती की जा रही है। सेवानिवृत्ति के समय ४,५,६ लाख रुपए जैसे भारी रकम की कटौती होने से वृद्धावस्था की सीढ़ियां आनंदमय न होकर एक दुर्गम गिरी सा कष्टकर अनुभव नर्स संवर्ग झेल रही है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने उक्त वेतन वृद्धि को रोके जाने व लाभान्वितों से वसुली करने की कार्यवाही का विरोध करते हुए इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
संघ के प्रांताध्यक्ष श्री आलोक मिश्रा ने सभी कर्मचारियों की जागरूकता हेतु बताया कि जो नर्स गण न्यायालय की शरण लिए है, उन्हें राहत मिली है।

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