भारतीय शहरी जीवनयापन में अभ्यस्थ लोगों को यह जानकर संभवतः अचरज होगा की स्वास्थ्य सलाहकार गाँव में नदी-तालाब में स्नान करने के तरीके को ब्रेन स्ट्रोक से बचने के दृष्टिकोण से उचित तरीका मानते हैl
नदी, झील या तालाब में स्नान के लिए पानी में पहले पैर जाते हैं, और इससे महसूस होता है कि पानी उग्र ठंडा है कि स्नेह-शीतल l इससे पानी के तापमान का बिना किसी जोखिम के पता चल जाता है, और फिर मंद गति से पानी में जाते जाना सहज और आनंदमय हो जाता है। जब गले तक पानी में पहुंचा जाता है तब शारीर का तापमान और पानी अनुकूल हो जाते हैंl फिर पानी में डुबकी लगते हैं अर्थात सिर को डुबाते हैं l
इस तरह स्नान की प्रक्रिया सर्वप्रथम युगल चरणों से प्रारंभ होकर सिर तक जाती है। भारत में सदियों से स्नान करने की आदत रही है कि पहले पांव, फिर कमर, गर्दन और सबसे अंत में सिर पर पानी डालना।

नहाते समय पानी को सीधे सिर पर डालना सही नहीं होता। सीधे सिर पर ठंडा पानी डालने से रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) गड़बड़ होता है। कैपलेरी वेन्स पहले सिकुड़ती हैं। फिर रक्तचाप अचानक से बढ़ जाता है। ब्रेन स्ट्रोक या हृदयघात बाथरूम में भी होते हैं, और इसे ‘Bathroom Stroke’ भी कहते हैंl
ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शीत, बसंत में स्नान की उक्त ग्रामीण विधि को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य सलाहकारों ने आगे बताया की सर्दी के मौसम में जब कोई सीधे सिर पर ठंडा पानी डालता है तो मस्तिष्क में तापमान को नियंत्रण करने वाला एड्रेनलिन हार्मोन तेजी से रिलीज होता है, जिसकी वजह से रक्तचाप एकदम से बढ़ता है स्वस्थ, सबल व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो जाता हैं l
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