प्रदेश शासन के स्वास्थ्य सेवाओं में अंतर्भुक्त प्रवीण नेत्र सहायक अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के शीर्षस्थ पदाधिकारियों में से एक अनुपम, निरुपम व्यक्तित्व के धनी श्री राजेंद्र प्रसाद यादव जी ने अपने सुदीर्घ सेवा अनुभव को साझा करते हुए कहा की कुछ लोग अपनी ही लापरवाही के कारण दृष्टिहीनता का खतरा मोल लेते हैं l

आँखों में कचरा आ जाने से या हल्की सी असामान्यता होने पर भी तुरंत नेत्र चिकित्सक के संपर्क में जाना चाहिएl यदि विलम्ब के कारण आँखों में अलसर हो गयी तो यह कॉर्नियल ओपेसिटी जैसी जटिलता को आँखों में प्रसुत करेगी, जिसका अंतिम और स्थायी परिणाम है दृष्टिहीनता l अपने नेत्र सुरक्षा के प्रति गैर जिम्मेदार कुछ लोगों के चिकित्सक सम्मुख अकपट कथनों का हवाला देते हुए श्री यादव ने उदाहरणों से सुशोभित कर  जानकारी दी की वे शनिवार को नेत्र समस्या होने पर बिलम्ब कर सोमवार को अस्पताल आये और तब तक अलसर हो चुका था l उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश की राजधानी स्थित शासकीय डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय का नेत्र विभाग चौबीस घंटा खुला रहता है, जहाँ किसी भी प्रकार के मरीज पहुंचकर त्वरित चिकित्सा लाभ ले सकता है l इसी तारतम्य में उन्होंने आगे बताया कि यह नेत्र विभाग अपनी शाखा-प्रशाखा का सुविस्तार करते हुए क्षेत्रीय नेत्र संस्थान बन चुका हैl यहाँ अब Regional Institute of Ophthalmology है, जहाँ छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उड़ीसा के मरीज आकर सेवातृप्त हो रहे हैं l प्रदेश शासन की एक और नेत्र चिकित्सा सुविधा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा की माना स्थित सिविल अस्पताल में १५०-बिस्तर की नेत्र चिकित्सालय अपनी महिमा लिए अस्तित्वमान हैl इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अंधत्व निवारण के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुभाष मिश्रा जी की ‘क्लान्ति विहीन’ प्रयत्नशीलता को ससम्मान दियाl

छत्तीसगढ़ राज्य को वर्ष २०२५ तक कॉर्निया की वजह से दृष्टिहीनता मुक्त राज्य बनाने का पुनीत लक्ष्य रखा गया हैl इस उपलब्धि हेतु जहाँ एक तरफ चिकित्सा अधोसंरचना और संलग्न  सुविधायों के मापदंडों पर उत्कृष्टता से उत्कृष्टता तक की यात्रा करना है, तो दूसरी तरफ आम जनता को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग प्रहरी बने रहना हैl

मरणोपरांत नेत्रदान के प्रकरणों में प्रदेश में वृद्धि तो दर्ज हो रही है, पर स्थिति का संतोषजनक होने का लक्षाभेदन अभी करना है l सिमित संख्या में उपलब्ध कॉर्निया लेकर सभी कॉर्निया के कारन दृष्टिहीन व्यक्तियों की दृष्टि नहीं लौटाई जा सकतीl इसलिए यह परमावश्यक है की लोग अपने नेत्र-स्वास्थ्य के प्रति और ज्यादा संवेदनशील हों, और किसी भी प्रकार का मरीज अपनी लापरवाही के कारण न बनेl श्री यादव सन १९८८ से सेवारत हैं l

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