रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की मांग कि समस्त स्वास्थ्य कर्मियों को पुलिस विभाग की तरह एक वर्ष में १३ माह का वेतन दिया जाय, को आज फलीभूत होने को सिंचन और प्राणवायु मिलीl संघ ने यह जानकारी दी की इस मांग पर शासन और मुख्यमंत्री सचिवालय सकारात्मक होकर पुलिस विभाग का आदेश माँगा है l

संघ ने अपने इस मांग के औचित्य पर अपना पक्ष कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि स्वास्थ्य कर्मी एवं उनके सेवाओं के शिरोबिंदु पर स्थित सम्मानीय चिकित्सक शासकीय सेवक है, पर उनके कार्य समय सीमाबद्ध न होकर सामान्य एवं असामान्य परिस्थितियों में २४ x ७ होकर आराम, अवकाश, त्यौहार-उत्साव के आनंद, उल्लास तथा पारिवारिक मधुमिलन विहीन हैl संघ ने इस बिंदु पर भी बल दिया की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा का क्षेत्र ‘शुन्य-त्रुटी’ का है l कोई चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मी किसी औपचारिक या अनौपचारिक आलोचना चक्र या लिखित प्रस्तुति में यह नहीं उल्लेख कर सकता की वह रोज मानो १०० मरीज देखता है तो किसी एक के साथ कुछ अप्रिय, अप्रीतिकर घट ही सकता हैl चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मियों की बिंदु मात्र शिथिलता मरीज के स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रतिबिंबित होती हैl तो, क्यों न उन्हें अन्य सेवाओं से पृथक सेवाधर्मी माना जायl
अपनी नित्य कर्त्तव्य परिक्रमा में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा देनेवाले सुदक्ष,सुवेशधारी कर्मिवृन्द को ज्ञात, अज्ञात अनुसरण में अपनी जीवन ज्योति के असामयिक बुझ जाने के जोखिम भी उठाते हैंl हाल ही में हुए वैशविक कोरोना संकट की मृत्युतालीका में भी ‘तरुण-अरुण’ चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों के नाम भी हैंl स्वास्थ्य कर्मियों की भाग्य तरी को संचारी रोगग्रस्त मरीजों के सीधे संपर्क में आकर ही तरना होता हैl
संघ ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया है कि शासन की वर्तमान सुविधा ‘हफ्ते में पांच कार्यदिवस’ से भी स्वास्थ्य कर्मचारी वंचित हैl अंत में संघ ने आशा व्यक्त की प्रदेश के संवेदनशील सरकार उनकी इस तृष्णा को तृप्त करेगीl
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