छत्तीसगढ़ राज्य में दिनांक 25 मई एक वह दिन है जिसे इस राज्य की शान्ति-श्रंखला को चाहनेवाले आम जनता कभी नहीं भूला पाएंगेl सन 2013 के इसी दिन प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेतागणों ने प्रदेश की माटी को अपने कर्म पथ पर चलते हुए अपना रक्त कमल अर्पित किये थेl ल्प्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज उन सभी शहीदों को याद किया और प्रदेश को आतंक और अपराध मुक्त करने की अपने संकल्प को दुहरायाl
आज झीरम श्रद्धांजलि दिवस में मुख्यमंत्री महोदय ने अपने संबोधन में उल्लेख किया की झीरम घाटी की घटना को घटित हुए दस बरस हो गये। हर साल हम लोग झीरम के शहीदों को नमन करते है। जब भी 25 मई आता है हम सब का दिल भर जाता है। जो बच गए उन्होंने घटना को अपनी आंखों से देखा। वे बताते थे कि घटना कितनी भयावह थी।

इस घटना में शहीद हुए नेताओं ने परिवर्तन की बात कही थी। जिसका शुभारंभ सरगुजा से हुआ था । हमारे नेता कहते थे कि किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं के जीवन में परिवर्तन लाना है। परिवर्तन का संकल्प लेने वाले हमारे सभी बड़े नेता हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने झीरम में अपनी शहादत दी है।
राजभवन सचिवालय के अधिकारी कर्मचारियों ने झीरम श्रद्धांजलि दिवस पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि और नक्सलवाद और हिंसा के विरुद्ध ली शपथ l झीरम श्रद्धांजलि दिवस के अवसर पर राजभवन सचिवालय के अधिकारियों- कर्मचारियों ने नक्सल हिंसा में शहीद हुए जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पदाधिकारी, सुरक्षाबलों के जवान एवं अन्य भाई-बहनों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन धारण किया और नक्सलवाद और सभी प्रकार की हिंसा के विरुद्ध शपथ ली।

इस अवसर पर समस्त कर्मचारियों को राज्यपाल के उपसचिव श्री दीपक कुमार अग्रवाल ने राज्य में अहिंसा एवं सहनशीलता पर दृढ़ विश्वास रखते हुए, नक्सलवाद और हिंसा का डटकर विरोध करने की निष्ठापूर्वक शपथ दिलाई। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य को पहले की तरह शांति का टापू बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित रहने की शपथ ली।
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