अपने पूर्व घोषित ‘स्वास्थ्य भवन घेराव’ विरोध
प्रदर्शन को दिनांक 6 अप्रैल को नया रायपुर में सफल बनाने के लिय छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के राजधानी स्थित प्रांतीय कार्यालय में प्रांतीय पदाधिकारियों के बीच गहन विचारों का विनिमय होता रहा। विगत 2 अप्रैल को उक्त कार्यालय में हुई महासमिती कि वैठक में सभी ने नव निर्वाचित प्रांताध्यक्ष श्री आलोक मिश्रा जी का उत्साहवर्धन एक स्वर में किया- ‘आलोक भैय्या आप संघर्ष करो, हम आपके साथ हैं’।

विरोध प्रदर्शन के पूर्व दिवस को प्रांताध्यक्ष महोदय ने स्वास्थ्य कर्मचारियों में जन्में ज्वालामुखी की झलक बताते हुये कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य कर्मचारियों को भारत शासन के कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण यह वेतन विसंगति है।

देश मे यह तो खुब कहा और लिखा जाता है,’समान कार्य-समान वेतन’, पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सेवा कर्मियों, जिनमें चिकित्सक भी शामिल हैं, को केन्द्र शासन के वेतनमान की तुलना में लगभग 15 से 20,000 रुपये कम मिल रहा है।

केन्द्र शासन के अधीनस्थ कर्मचारियों में से ज्यादातर कर्मचारी सर्वसुविधा संपन्न शहरी क्षेत्रों में स्थापित संस्थानों में काम करते हैं। राज्य शासन के स्वास्थ्य कर्मचारियों को सुदूर, सुविधाहिन तथा नक्सली आतंक से प्रभावित ग्रामीण तथा वनांचलों में भी नित्य सेवा देनी पड़ती है।

यदि राज्य शासन द्वारा वर्तमान में प्रदाय किये जानेवाले भत्तों को उल्लेख की जाये तो आज भी स्वास्थ्य कर्मचारियों को पुराने वेतनमान अनुसार गृहभाड़ा भत्ता मात्र 100/200 रुपय, चिकित्सा भत्ता मात्र 500/700/1000 रूपये ही मिल रहा है।

केन्द्र शासित स्वास्थ्य कर्मचारियों को मिलनेवाली भत्तों की संख्या भी अधिक है। आगे श्री आलोक मिश्रा जी ने ज़ोर देकर कहा कि जब तक मांगें पुरी नहीं होती, विरोध का स्वर गुंजता रहेगा।

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